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मेरे अल्फाज़

" सिंहासन डोलेगा "

Anil Kumar

543 कविताएं

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लहू में उबाल लाओ नौजवानों।
मर्दानगी कुछ तो दिखाओ नौजवानों।।
जब तक रक्त सर चढ़ कर नहीं बोलेगा।
महाकाल का सिंहासन नहीं डोलेगा।।
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सियासती गद्दारों की छोड़ो बातें।
गद्दारों की ख़ीच ख़ीच तोड़ो आंतें।।
दहशत कूट कूट कर भर दो सीनों में।
लाज शरम है ही नहीं कमीनों में।।
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जिसकी रक्षा में ये प्राण गवाते हैं।
वही दोगले लुच्चापन दिखलाते हैं।।
जिनका आंचल मांग सहारा टूटा है।
उनको चंद चवन्नी देकर लूटा है।।
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ना हम भूलेंगे चौदह दो उन्नीस को।
ना तुझे आसानी से भूलने ही देंगे।।
क़तरे क़तरे का हिसाब कर डालेंगे।
बच्चा बच्चा महाकालिका बोलेगा।।
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. .पंडित अनिल
. अहमदनगर, महाराष्ट्र

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