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मेरे अल्फाज़

मुझे यह याद नहीं थी बात

Anil Kumar

387 कविताएं

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 मुझे यह याद नहीं थी बात "



मेरा घर तिनके का फूस का,उसका महलों रास।
मुझे यह याद नहीं थी बात।।



वो नभ का चमकीला तारा,मेरी जुगनू भर ना औकात।
मुझे यह याद नहीं थी बात।।



मेरा मुखड़ा स्याह बुझा सा,उसका नूरानी सौगात।
मुझे यह याद नहीं थी बात।।



उसके चारसूं चाॅद का डोला,मैं अंधियारी रात।
मुझे यह याद नहीं थी बात।।



वह मन्नत से उतरा पालने,मैं बिन मांगी खैरात।
मुझे यह याद नहीं थी बात।।



मैं तिनके मुंह ओस के जैसा,वह कैफ़ई बरसात।
मुझे यह याद नहीं थी बात।।



वह हरियाली सावन भादों,मैं पतझारी इक पात।
मुझे यह याद नहीं थी बात।।



उसका जीना अनिल मधुमय,मलयमयी मधुमास।
मुझे यह याद नहीं थी बात।।



 पंडित अनिल
 अहमदनगर महाराष्ट्र



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