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मेरे अल्फाज़

छठ गीत

Anil Kumar

153 कविताएं

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 छठ गीत 

 दरशन देईं सवॅकेर 



उगीं हे सुरुज देव,अरघा के बेरिया,काहें लगावेनीं अबेर।
घाटे पर बाट निहारे परबइतिनि देईं तनी नयन अब फेर।।
अॅचरा जुड़ाईल रहे मांग सेनुरा रहे घरवा में आनंद शोर।
पगड़ी बनल रहे नइहर ससुरा के रहे ऊॅच दुनों मुॅडेर।।



केरवा के पात पर धाही देईं नाथ जी काॅपेला देहियाॅ को पोर।
पाला जइसन पनिया में देहिं कठुआला सूखल कंठ के छोर।।
बीतल राति परब छठि मईया जी अब करें घर अॅगना अॅजोर।
सात गो घोड़वा के रथवा सवार भइनीं दरशन देईं सवॅकेर।।



कलसुप लिहले अॅचरा पसरले हम करेनीं बिनती निहोर।
उगीं उगीं देव जी मनसा पुराईं करें मांग सगुनी बहोर।।
लीहीं अरघ परबइतिनि के मांगीं आशीष नोह जोर।
नरियर हरदी पान के पतईया अरपन बा हर बेर।।



पंडित अनिल
अहमदनगर महाराष्ट्र
8968361211


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