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मेरे अल्फाज़

जब मुझको भुलाया होगा

Anant Ram

3 कविताएं

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उसने जब मुझको भुलाया होगा
कितना खुद को ही सताया होगा

यादें रह रह के सताती होंगी
नींद रातों में ना आती होंगी
मेरे  खत पढ़के शुकून पाने को
शब्बे शम्मा को जलाया होगा

उसने जब मुझको भुलाया होगा
कितना खुद को ही सताया होगा

रात नागिन सी जो डसती होगी,
दिल में एक कसक सी उठती होगी,
बढ़ रही बेकली  छुपाने को
तकिया सीने से सटाया होगा

उसने जब मुझको भुलाया होगा
कितना खुद को ही सताया होगा

आंखें भर भर जब भी आती होंगी
आँसू सबसे वो छुपाती होगी
सिर सहेली के कांधे पर रखकर
देर तक फिर न उठाया होगा

उसने जब मुझको भुलाया होगा
कितना खुद को ही सताया होगा।
  
अनंतराम मिश्र

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