आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   बेटी की अस्मत

मेरे अल्फाज़

बेटी की अस्मत

Anand Tiwari

15 कविताएं

99 Views
बेटी की अस्मत लूट रहे कुछ राक्षस ,पर ....
हम तो अभी तौलेंगे इसे जाति पाति के पलड़े पर ।।

कोई तो इन्हें बताए ,कोई इनको समझाए ।
राक्षस की कोई जाति नही पर कौन इन्हें बतलाए ।।

बेटी, बहन और माँ ये दया और करुणा की मूर्ति है ।
प्रतिफल की तू प्रतीक्षा कर, ये काली और दुर्गा की मूर्ति हैं ।।

दावानल सी दहक रही ,रुक जा रुक जा ,मैं आती हुँ ।
करने को तेरा अंत अभी ,काली का रूप बनाती हुँ ।।

अब तो ना धृतराष्ट्र बनो ,ना करो प्रतीक्षा बारी का पर ।
हम तो अभी तौलेंगे इसे ,जाति पाति के पलड़े पर ।।

अनुनय विनय करू मैं ,लोकतंत्र के चारो स्तम्भों से ।
कुछ करो कि बच जाए सभी प्यारी बेटी,इन राक्षस और दरिंदों से ।।

जिस ओर नज़र जाए मेरी ,पाऊँ कौरव के सभाकक्ष,पर......
बेटी की अस्मत लूट रहे कुछ राक्षस, पर.....

। निःशब्द ।

- आनन्द तिवारी, वाराणसी 

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!