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मेरे अल्फाज़

"एक स्वागत-गीत"

Anand Kumar

22 कविताएं

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हर कली-फूल है आप ही के लिए
हर गली सज रही आप ही के लिए
आप आराध्य हैं आप आराधना-
आप ही साध्य हैं आप ही साधना
इस चमन की बहारें समर्पित तुम्हें
है ये महफ़िल सजी आप ही के लिये
हर कली-फूल है आप ही के लिए ।।1
पैर धोएं तथा आचमन भी करें
स्नान, चंदन से लेपित बदन भी करें।
ये कलश आपके आगमन में रखा-
अर्घ्य अर्पित किया आप ही के लिए
हर कली -फूल है आप ही के लिए।।2
धूप है, दीप है, आरती है सजी-
घण्टियाँ प्यार की दिल में हर-पल बजी
फल तथा भोग है ये निवेदित तुम्हे
शुद्ध आहार है आप ही के लिए
हर कली -फूल है आप ही के लिए।।3
गीत-नर्तन तथा वाद्य झंकार है
नख से चोटी तलक खूब श्रृंगार है
आरती थाल लेकर मुदित देर तक
खुश है दिल से तो वो आप ही के लिए
हर कली -फूल है आप ही के लिए।।4
आप आये हृदय में उमंगे उठीं-
सुप्त सागर में ऊंची तरंगे उठीं
आप का आगमन है बहुत ही सुखद,
खुश है "आनंद" तो आप ही के लिए
हर कली -फूल है आप ही के लिए।।5
-आनंद कुमार मिश्र, दिल्ली
स्वरचित।


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