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मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल- काश फुरसत में मैं जिया होता

Anand Kumar

22 कविताएं

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ग़ज़ल
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काश फुरसत में मैं जिया होता
जल्द रातों को घर गया होता

हाथ कागज कलम पकड़ने से
दर्द गजलों में कुछ सिया होता

वक्त के हाथ का मैं मारा हूँ
कुछ उसे फिर भी मैं दिया होता

टूटते दिल का साज हूँ यारों
बोझ मन का छिपा लिया होता

आज आनंद का बहाना है
ज़ाम खुद का कभी पिया होता
-आनंद कुमार मिश्र, दिल्ली
स्वरचित।


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