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मेरे अल्फाज़

मैं धरती तुम आसमान हो

Amulya Ratna Tiwari

6 कविताएं

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मैं धरती तुम आसमान हो

मैं धरती तुम आसमान हो
मैं नदी तुम हिमालय महान हो
जिसको लिए दिन-रात हूं फिरता
मैं वह आंसू और तुम मुस्कान हो
मैं धरती तुम आसमान हो|

मैं देवरिया शहर तुम सारा जहान हो
मैं पागल औरंगजेब और तुम अकबर महान हो
जिसके लिए है काशी प्रसिद्ध
लालिमा भरी तुम वह बनारसी पान हो
मैं धरती तुम आसमान हो |

मैं छोटा बच्चा तुम मुझ में बसने वाली प्राण हो
होती मेरी निंदा तुम मेरी गुड़गान हो
जिंदगी भरी उथल-पुथलो से
फिर भी तुम मेरी जान थी और मेरी जान हो
मैं धरती तुम आसमान हो|
मैं धरती तुम आसमान हो||

~ गौरव यादव
काशी हिंदू विश्वविद्यालय


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