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Bajrang bali

मेरे अल्फाज़

श्रीराम

Amulya Mishra

13 कविताएं

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बस एक रज़ा है इतनी सी जबतक शरीर में प्राण रहे।
होठों पर हो बजरंग बली,और सीने में श्रीराम रहे।

जब काल सामने बैठा हो,और मृत्यु की तैयारी हो।
जीवन से हार के बैठे हो, या गम खुशियों पे भारी हो।
जब गम के बादल हो सर पे,और दुश्मन दुनिया सारी हो।
फिर शीश कटे या रणथल में, या जश्न की तैयारी हो।
बस एक बात यह मन मे हो, चाहे दैत्यों से संग्राम रहे।
होठों पर हो बजरंग बली,और सीने में श्रीराम रहे।
-अमूल्य मिश्रा

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