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मेरे अल्फाज़

पिता की मौत

Amitabh Varma

2 कविताएं

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मेरे निस्पन्द शरीर के गिर्द
मेरे बच्चे फुसफुसा रहे थे
कभी मेरे गुण गा रहे थे
तो कभी आँसू बहा रहे थे

मेरा हृदय भर आया
मैंने अंतिम ज़ोर लगाया
कलेजा मुँह को आया
पर फिर नज़र आया

बेटा-बहू, बेटी-दामाद
सभी कर रहे थे मुझको याद
मृत्यु दो, पर कुछ पल बाद
की ईश्वर से मैंने फ़रियाद

मौत दे रही थी मीठी थपकी
मेरी साँसें थी अब भी अटकी
लेकिन पलकें ज़रा-सी झपकीं
भीड़ यह देखते ही लपकी

इन्होंने बेकार ही डरा डाला था
हमने भी क्या-क्या सोच डाला था
कितना ज़रूरी काम टाला था
बच्चों ने झट से कह डाला था

एक नज़र डाल सभी चल दिए
मैंने भी दुनिया को हाथ जोड़ दिए
बच्चों को आशीष दे दिए
और बुझा लिए अपनी आँखों के दिये।।

- अमिताभ वर्मा 

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