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मेरे अल्फाज़

तिमिर

Amita Singh

6 कविताएं

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हजारों दिये झिलमिलाये निशा में,
ये मन का तिमिर है कि मिटता नहीं।
ये किन रास्तों पर चले जा रहे हैं ,
ये कैसा सफ़र है कि कटता नहीं।।
हरेक ज़िन्दगी मौत की है अमानत,
हरेक सांस पर जाने किसका है पहरा,
कहीं पर हंसी है, कहीं पर हैं आंसू
खेल ज्ञीवन मरणं का ये रुकता नहीं।।
हजारों दिये झिलमिलाये निशा में  ये
मन का तिमिर है कि मिटता नहीं।।।

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