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मेरे अल्फाज़

मुसाफिर

Amita Singh

6 कविताएं

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रात का महका है आंचल।
चांद का दहका है काजल।
बहकी बहकी चल रही ठंडी हवा।
मैं मुसाफिर हूं फकत इस रात का,
क्या पता?चल दूं मैं कल जाने कहां।
गुलमोहर से झर रहे पल,प्राण प्यासे,
हर सांस व्याकुल,सहमी सहमी है ये,
आंखों की जुवां मेेें मुसाफिर हूं फकत
इस रात का ...............



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