आज़ादी की रात सुहानी

                                वो आज़ादी की रात सुहानी,
जिसके लिए कुर्बान हो गई आजाद भगत की जवानी,
वो आज़ादी की रात सुहानी।।

वो रात कितनी हसीन होगी,
वो दिन कितना झूमा होगा।
जिस दिन भारत का शान तिरंगा,
चीर गगन को चूमा होगा ।
सुभाष चंद्र के हिंद फौज़ की वो जीत कितनी रूहानी,
वो आज़ादी की रात सुहानी।।

जिस दिन नेहरू की आंखों का सपना साकार हुआ होगा,
जिस दिन भारत की भूमि पर बस भारत का अधिकार हुआ होगा ।
जय हिन्द का शोर सुनकर आज़ादी का चांद खिला होगा,
भारत के वीर सपूतों को शहादत का गौरव मिला होगा ।
जोशीले सुकून का अनुभव कर रही होगी लक्ष्मी की तलवार पुरानी,
वो आज़ादी की रात सुहानी।।

गांधी के अहिंसक आंदोलनों ने जिस दिन बढ़कर बोला होगा ,
भारत के वीर सपूतों का रक्त जिस दिन खौला होगा।
जिस दिन सुनी होगी राष्ट्रगीत की गौरव गाथा,
इंकलाब के नारों से जिस दिन नभ गूंजा होगा।
बाबा साहब के कलम ने लिखी होगी भारत की नई कहानी,
वो आज़ादी की रात सुहानी।।

वीरगति से गदगद हो गई वो माता की अंचल विरानी,
वो आज़ादी की रात सुहानी।।

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5 days ago
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