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मेरे अल्फाज़

बेईमान मोहब्बत

Amit Tiwari

17 कविताएं

12 Views
उसने मुझे भुला दिया गिला नहीं
मेरी मोहब्बत का ये शिला दिया गिला नहीं
तुम्ही बताओ कि कौन सा कसूर है मेरा
उसने किसी और से दिल लगा लिया गिला नहीं
बदनाम मै हुआ नीलामी भी मेरी हुई
उसने सबकी नजरो से इस कदर गिरा दिया गिला नहीं
अब उसके नाम से मुझे पुकारते है लोग
मोहब्बत की है क्या कोई गुनाह किया गिला नहीं
अब तो मोहल्ले मे होती है रोज जंगे
उसने हर शक्स को मजनू बना दिया गिला नहीं 


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