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मेरे अल्फाज़

ये प्यार में अक्सर होता है

Amit premshanker

45 कविताएं

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इश्क प्यार में न जाने
ऐसा क्यूं अक्सर होता है
झूठा छलिया मस्त मगन
सच्चा प्रेमी ही रोता है।

सो जाता ए जग सारा
कोई रात रात न सोता है
तड़प तड़प के दिन बीते
उसे क्यूं एहसास न होता है।

मानें न ए दिल पागल
क्यूं सपने ऐसे ढोता है
जिसकी कोई आस नहीं
ए दिल क्यूं उसपे मरता है।

पुछो जाके उससे तुम
जो दिल ही दिल में रोता है
वो मनचली क्या जाने कि
दुख दर्द क्या होता है।

कवि:- अमित प्रेमशंकर ✍️
एदला,सिमरिया, चतरा (झारखण्ड)

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