आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Hum kya hain hamee jaanate hain

मेरे अल्फाज़

हम क्या हैं हमीं जानते हैं

Amit Pandey

92 कविताएं

960 Views
हम क्या हैं ये हमीं जानते हैं
सब्र करते हैं सब काे मानते हैं

बड़े तंज़ कसते हैं लाेग हमारे ऊपर
उन्हें क्या पता हम कायनात थामते हैं

देते हैं सहारा जिसकाे भी ज़माने में
फ़रिश्ते भी उस शख़्स को पहचानते हैं

झुका लेते हैं सर हर मज़हब के आगे
यही इल्म ख़ानदानी परवरिश की अमानतें हैं

अगर मुद्दा है कि रूतबा कैसे बना
ताे हम सिर्फ परवरदिगार से माँगते हैं

मिलती है इतनी माेहब्बतें आप सभी से
देते हैं दुआएं आपको नेकियाें से बाँधते हैं



- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!