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Feeling

मेरे अल्फाज़

एहसास और जिंदगी...

Amit Pandey

63 कविताएं

1659 Views
दिखने लगी कमियां जो छिपी थी अंजान में
झाँकने लगे जब अपने ही गिरेबान में
लगाते रहे इल्जाम दूसराें पर हमेशा
करते थे गलतियां वो आयी अब पहचान में
दिखने लगी कमियां जो छिपी थी अंजान में

समझ चुके जबसे अपनी ये गलती
हो गए खामाेश जुबां चुप मिलती
बदलने लगे आदत जो पहले थी ज़ुबान में
दिखने लगी कमियां जो छिपी थी अंजान में

छाेड़ दिया करना ग़ुरूर किसी बात पर
मिल गई तसल्ली बदले हुऐ ख़्यालात पर
बनाने लगे रिश्ते जो टूटे थे गुमान में
दिखने लगी कमियां जो छिपी थी अंजान में

मान जायेंगे सब शराफ़त मेरी देखकर
खुश करेंगे सबकाे अदब से हाथ जोड़कर
हाेगी दूर नाराजगी एक प्यारी सी मुस्कान में
दिखने लगी कमियां जो छिपी थी अंजान में

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