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मेरे अल्फाज़

भंवरा

Amit Kumar

4 कविताएं

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रस रस बनी तू ,मधूर पाग से .
नयन सुख मिलता हैं तेरे सुंदर राग से
छावनी बनी तू ललिता के दाग से
ऐ चाँद की चाद्नी अजोरी
मिटता न्ही तेरा अगंरस,इश रवि के आग से

अचुली सा जीवन तेरा
सन्ताप का भाव तेरा
डूबी h टू इश अवनी me
फिर क्यों देख रहा तुझको आस्मा सारा

तेरा अपना to कोई न्ही हैं
फिर क्यों प्रेम दिखा रही
अच्छा ये अभाव का प्रभाव हैं
तभी एक पल के लिए पूरी जिंदगी काटी जा रही

वीणा के ताग्ग si ये काया तेरी हैं
तू दासी हैं क्या सुंदरता की
या पक्षिल छाया तेरी हैं
ये मौसम तेरे माया का भरम हैं
ये नाग्मा तेरी धुन का hai
Ya छिया (सुंदर रचना ) hai तेरी हैं

-अमित कुमार
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