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मेरे अल्फाज़

मेरे संग तुम शाम बिताकर तो देखो

Amit Beniwal

2 कविताएं

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मेरे संग तुम शाम बिताकर तो देखो,
दिल को दिल से मिलाकर तो देखो।

भूल के ही सही ख़ता के रूप में ही,
एकबार मेरी राह में आकर तो देखो।

बेगानों में खुशियाँ ढूंढ़ते फिरते हो,
अपनों को जरा गले लगाकर तो देखो।

इश्क़ मुहब्बत सब एक तरफ़ हो जायेंगे,
हाल फिलहाल ठोकरे खाकर तो देखो।

ढांढस बंध जाएगा खुद ही 'विकाश',
कुछ पल मयखानो में गुजराकर तो देखो।

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