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मेरे अल्फाज़

मेरी एक नज़्म नई पीढ़ी के नाम...

Amim Jafri

1 कविता

15 Views
मैं अक्सर रात में जब देर से ऑफ़िस से चलता हूँ..
तो मुझको रास्ते में नौजवां ऐसे भी मिलते हैं ..
जो मोबाइल को अपने कान में चिपकाए रहते हैं ..
हमेशा उस जगह मौजूद होते हैं ये दीवाने ..
जहां पर मुख़्तसर लोगों का आना जाना रहता है ..
सड़क पर भी नए कुछ ऐसे लड़के मुझको दिखते हैं..
जिन्हें आदत है मोटर साइकिल पर बात करने की..
ये कानों और कांधों पर लगाए अपने मोबाइल ..
ये सुनते ही नहीं हैं हॉर्न की आवाज़ पीछे से ..
न इनको मौत का डर है न मुस्तक़बिल से मतलब है

मुझे हैरत ये होती है कि वो लड़की कहाँ होगी ?
जो सारी रात बातें कर रही है एक लड़के से ..
उसे माँ बाप का कोई भी डर होता नहीं है क्या ?
वो कितने झूठ कितने ही बहाने ढूंढती होगी ..
कभी लगता है शायद उसके घर के लोग बहरे हैं ..

कभी ये चाँद तारे तोड कर लाने को कहते हैं ..
कभी बूढे मियाँ बीवी के जैसे लड़ते रहते हैं ..
ये अपने घर के सारे भेद उस पर खोल देते हैं ..
ये पहले ही बता देते हैं क्या औक़ात है उनकी ..
फिर उसके बाद वो आती है जब इनके नशेमन में ..
तो फिर कुछ रह नहीं जाता कि जिस पर बात की जाए..
जो बातें आज की जानी थीं वो तो कर चुके पहले ..
नतीजा ये निकलता है कि फिर ऐसे गुज़रती है ..
कि इक छत के तले दो दुश्मनों को जीना पड़ता है..

अरे नादान लोगो जानते हो इश्क़ क्या शय है ?
मोहब्बत किसको कहते हैं नहीं मालूम है तुमको ..
कभी उंगली भी मेहबूबा की दिख जाती थी जब हमको
कई रातें गुज़र जाती थीं सिर्फ इतनी ख़ुशी पा कर ..
कभी ऐसा भी देखा है कि दिल में प्यार होता था ..
मगर इज़हार करने में जुबानें काँप जाती थीं ..
विदा हो कर चली जाती थी लड़की दिल में ग़म ले कर ..
कभी लड़के को उस लड़की की शादी में भी देखा है..
मोहब्बत थी जिसे लेकिन जुबां से कह नहीं पाया ..
मगर बारात में शामिल हुआ इस ख़ौफ़ से हंस कर..
कहीं शक ही न कर बैठे कोई कि क्यों नहीं आया ?

चलो मैं मानता हूँ तुम नयी दुनिया में उतरे हो ..
यहाँ वो सब मयस्सर है तुम्हारा जो भी दिल चाहे ..
मगर हर काम की इक उम्र होती है मिरे बच्चो ..
अभी क्यों इस क़दर बेताब हो तुम बात करने को ..
पड़ी है उम्र अभी बातें भी करना प्यार भी करना ..
अभी इल्मो हुनर हासिल करो और ऐसे बन जाओ ..
न जाने कितने सीनों में तुम्हें पाने की ख्वाहिश हो..
अगर तुमने किसी को ख़ुद ही माँगा है तो क्या माँगा?
मज़ा तो तब है जब वो शख्स जिसको चाहते हो तुम..
तुम्हारी कामयाबी देख कर तुमको वो ख़ुद मांगे ..

अमीम जाफ़री
130/530. Baqarganj Bazar,
PS Babupurwa Kanpur Nagar

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