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मेरे अल्फाज़

उसकी नजर अब बदल गई

Ami srivastav

3 कविताएं

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उसकी नजर अब बदल गई दिल से वो अब निकल गई
जिस नजर से करता था मैं प्यार वो नजर ही मुंह मोड़ गई
उसने किये थे मुझसे कई वादे हर वादे से वो मुकर गई
खाई थी उसने कई कसमे हर कसमो से वो पलट गई
जिस नजरो मे था घर मेरा घर से वो मुझे निकाल गई
नजरो से धोखे देकर दिल मेरा वो तोड़ गई
हरपल के लिए तनहा मुझको वो अब छोड़ गई
नजरो मे मुझको बैठाकर धक्का देकर वो निकल गई
अब मेरी नजरे भी कहती है जो दिल मे रहती थी हरपल
दिल से वो अब निकल गई
उसकी नजर अब बदल गई दिल से वो अब निकल गई
मेरी तीसरी कविता अपनी प्रतिक्रिया अवश्य देवे धन्यवाद
(अमन प्रियदर्शी श्रीवास्तव ,प्रसून )
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