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देशभक्ति और पराक्रम

                
                                                                                 
                            हमने हमेशा दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया है,
                                                                                                

इसे हमारी कमजोरी का इजहार ना समझा जाए,

अस्त्र और शस्त्र हमारे तरकश में भी बहुत हैं,
हमें सूखी लकड़ी की तलवार ना समझा जाए,

इरादों और हौसलों के फौलाद का ये मजबूत किला है,
इसे सिर्फ ईट-पत्थर की दीवार ना समझा जाए,

अभिनंदन और अभिमन्यु जैसे महान वीरों का ये वतन है,
कुछ जयचंदों को पूरे देश का ठेकेदार ना समझा जाए,

द्रोणाचार्य को अर्जुन की ये गुरु दक्षिणा है,
इसे गांडीव धनुष की टंकार ना समझा जाए,

गीता में श्री कृष्ण का ये शांति संदेश है,
इसे धर्म युद्ध की ललकार ना समझा जाए ।

~ अम्बुज गर्ग (बिजनौरी)
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2 months ago

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