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मेरे अल्फाज़

हँसने पर प्रतिबंध लगा है...

amarendra karna

8 कविताएं

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हँसने पर प्रतिबंध लगा है 
रोना है तो जी भर रो ले,
रोना ही तेरे बस में है,
हँस कर ना उपहास उड़ाना 
हँसने पर प्रतिबंध लगा है ।

वह अतीत को भूल ना जाना,
शैशव सा तुम गोद में लेटे,
ग्रीवा तुम्हारी उसके अंचल में,
आँचल में ना दाग लगाना 
हँसने पर प्रतिबंध लगा है ।

वह स्थल बस याद रहा अब,
जिस पर था अधिकार हमारा,
फेर अंगुलियां अधर मध्य में,
फिर से ना अधिकार जताना 
हँसने पर प्रतिबंध लगा है ।

याद, याद बस याद तुम्हारी,
पलकों पर ढोता फिरता हूँ 
पागल मन में आग लगी है,
यह आग ना कभी बुझाना ।
हँसने पर प्रतिबंध लगा है ।

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