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मेरे अल्फाज़

नहीं जान पाते

Aman Purwar

1 कविता

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किसी को मंजिल बिन जाने मिल जाती है,
और कोई इसे जानने में दशकों लगा देते हैं,
कोई ज़िन्दगी के मकसद पूरे करके जीता है,
और कुछ इसे मरते दम तक जान नहीं पाते

एक सफ़र काफी होता है दुनिया जानने के लिए,
और कुछ ज़माने को ज़िन्दगी भर नहीं जान पाते,
अनुशासन में रहने में कोई हर्ज़ नहीं है,
वो भी मौज करते है जो आवारा नहीं जान पाते

रहीसो के रुबाब पर बहुत देते हैं भाषण लोग,
पर रुबाब के पीछे क़ी मेहनत नहीं जान पाते,
क्यूंकि जो खुद ही दर्द से डरकर जीते हैं,
वो दर्द को हराकर कामयाबी के मायने नहीं जान पाते

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