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मेरे अल्फाज़

तू और इश्क

Alok Singh

1 कविता

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हर बार जब तेरा इंतजार करता हूं
खुद से बात सौ बार करता हूं ।
संवर कर जब आओगी सामने
डुब ना जाऊं तेरी आरजू में
खुद को पहले ही तैयार करता हूं ।

आखिर जब भी तु आती है
भूल जाता हूं वो जो याद करता हूं ।
कुछ और मतलब नहीं इन सब बातों का
बस इतना ही कहना है मैं तुमसे प्यार करता हूं ।।

इधर आओ करीब जरा, कुछ बोलना है कान में
क्या तुम बताओगी ? कयामत ,बला खुबसुरत
या काश्मीर की वादिया...... क्या हो तुम?
जब भी आती हो दिल मुहब्बत में घायल ही होता है ।

-आलोक सिंह

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