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मेरे अल्फाज़

इस सफ़र को कोई तो मंजिल मिलनी चाहिए

Alok Kumar Gupta

3 कविताएं

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इस सफ़र को कोई तो मंजिल मिलनी चाहिए ।
जिंदगी पल भर सही पर ठहरनी चाहिए।।

एक काली सी अंधेरी रास्ते भर को रही,
धूप थोड़ी ही सही पर निकलनी चाहिए।।

इश्क़ में रंगीन होकर झूमती है हर फिजा,
इन हवाओं की बुरी फ़ितरत बदलनी चाहिए।।

बारिशों की जुल्म ओढ़े कह रही है झोपड़ी,
मालदारों की भी कभी छत टपकनी चाहिए ।।

है पागलों की हंसी में दर्द का खारा समंदर,
बात दुनिया को मगर यह समझनी चाहिए।।

इस अजनबी परिवेश में सब मतलबी से लोग हैं,
इस शहर की सूरत अब बदलनी चाहिए।।
-आलोक गुप्ता


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