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मेरे अल्फाज़

प्यारी सुबह

Alija Kumari

48 कविताएं

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सुबह-सुबह मेरे खिड़की पर,
कुछ चिड़ियां मंडराती है।
कभी अमरूद की डाली पर,
कभी खिड़की पर बैठ जाती है।
प्यारे -प्यारे गाना गाकर,
नित्य सुबह हमें जगाती है।
सुबह की लाली आने से पहले,
वह मेरे खिड़की पर आ जाती है।
आलस्य नहीं लगता उनको,
सुबह-सुबह जग जाती है।
सूरज ढलते ही चिड़िया,
अपने घर को जाती है।
पूरे दिन अमरुद के डाली पर,
अपना बसेरा बनाती है।
चिड़ियों की आवाज से,
वातावरण पावन बन जाता है।
इन के गानों के बिन जैसे,
सुबह नहीं हो पाती है।
सुबह-सुबह मेरे खिड़की पर,
कुछ चिड़ियां मंडराती है।
:-एलिजा


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