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मेरे अल्फाज़

कुछ को बदलना बाकी है

Alija Kumari

59 कविताएं

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कुछ बेटी बदल चुकी,
कुछ को बदलना बाँकी है।
कुछ सपने पूरे हुए,
कुछ सपने सजाना बाँकी है।
कुछ मंजिल पा चुके,
कुछ मंजिल को पाना बाँकी है।
जन्म से पहले मर रही बेटी,
उन्हें बचाना बाँकी है।
तोड़कर चाहरदीवारी को,
अभी बाहर आना बाँकी है।
स्वतंत्र नभ में बेटी को,
पंख फैलाना बाँकी है।
समाज की कुरीति को,
अभी मिटाना बाँकी है।
फेंककर बेटी को चूड़ी -पायल,
रेस लगाना बाँकी है।
लड़कर हर जंग से,
अभी सम्मान पाना बाकी है।
कुछ बेटी तो बदल चुकी,
कुछ को बदलना बाकी है।


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