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मेरे अल्फाज़

खामोश पिता

Alija Kumari

28 कविताएं

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खामोश हैं वे,
दिल में प्यार है।
बच्चों में भरे,
उत्तम संस्कार हैं,
पर्वत सा वे दिखते कठोर है,
फूलों सा कोमल उनका हृदय है।
अनुशासन का वो,
पाठ अडीग हैं,
सपनों का साकार रूप हैं।
ख्याल है उनको हर किसी का,
ध्यान कभी ना भटके उनका।
नदियों का वे स्वच्छ जल हैं,
पीपल का भी छांव वही हैं।
बच्चों पर है सबकुछ अर्पण,
उनके रक्षा में तन-मन समर्पण।
ईश्वर तो बस नाम मात्र हैं,
उनका वे साकार रूप हैं।
कभी वे दुख ना आने देते,
भूखे पेट ना सोने देते,
चाहे लाख पीड़ा हो उनको,
बच्चों को भनक ना पड़ने देते ।
उनका छांव बहुत घनी है,
बच्चों को कभी ना धूप पड़ी है।
खामोश हैं वे दिल में प्यार है ,
बच्चों में भरते उत्तम संस्कार हैं।
उनको पिता का मिला अधिकार है,
उनके चरणों में स्वर्ग सा संसार हैं।


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