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मेरे अल्फाज़

सैनिक

akshita Jangid

7 कविताएं

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(सैनिक)

हर रोज कफ़न का चौला वो, माथे पर औढे़ बैठा हैं
किसी को उसकी परवा़ह नहीं, वो परवा़ह में सबके बैठा हैं |

ना जाने कितनी ही गोलियां, हम सबकी रक्षा को सहता हैं
कल तक जो सबका था, आज शहीद बनकर बैठा हैं |

माँ का आंचल छोड़ वो, माँ भारती को गले लगाता हैं
अपनी रक्षा खुदा पर छोड़, दूर शरहद पर वो बैठा हैं |

माथे पर कोई शिकन नहीं, सांए में मौत के रहता हैं
प्राण गवाने को हर पर वो, खुशी से अपने बैठा हैं |

खुशी है उसके चेहरे पर, अपना फ़र्ज निभाया हैं
अपने देश का मान वो, ऊँचा करके बैठा हैं |

by:-akshita jangid
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