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Urge of a moment

मेरे अल्फाज़

एक पल की दरकार...

akshay gupta

1 कविता

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चलो आज का पल ये साझा सा कर लें..

वो पत्ते चनारों के, रस्तों के मोड़
रूहानी वो चाहत जताने की होड़,
कुछ तुम कहो अपनी, कुछ हम कहें..
चलो आज का पल ये साझा-सा कर लें..

वो सुबहा बनीं तेरी बाहों में शामें,
वो शोखी मुहब्बत की, धड़कन की जामें,
ना मर कर भी तेरी मुहब्बत को छोड़ें
चलो आज का पल ये साझा-सा कर लें..

था इक पल भी ऐसा, के जब तुम ना हम थे,
था मेरा तो साया मगर तुम ही गुम थे,
मिले हैं जो अब चल के इस पल को जी लें,
चलो आज का पल ये साझा-सा कर लें

चलो आज का पल ये साझा-सा कर लें


उपरोक्त रचनाकार का दावा है कि ये उनकी स्वरचित कविता है। 
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