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मेरे अल्फाज़

इश्क़ क्या है, ये कोई दीवाना ही बता सकता है

Akhil Akhil

32 कविताएं

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गर दिल में दर्द न होता,तो खुशी का मजा क्या होता,
दिल न होता सीने में तो, जीने का मजा क्या होता ,

बात-बात पर जाने क्यों आँखें भिगो लेते हैं लोग
आँसू अगर न होते तो रोने का मजा क्या होता,

मयखाने में जाकर कोई मयकशों से पूछे तो सही
नशा शराब में न होता तो पीने का मजा क्या होता,

मेरे मुस्कराने को लोग यूँ ही बेवजह नाम देते हैं
वो क्या जाने बेवजह मुस्कराने का मजा क्या होता,

इश्क़ क्या है ये कोई दीवाना ही बता सकता है
प्यार में घुट घुट के मरने का मजा क्या होता,

कागज कलम के बीच से जो शब्द निकलते हैं अखिल
पढ़ने वाला समझता है लिखने का मजा क्या होता,

- अखिल बदायूंनी

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