आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Prem ka Geet Savan Mahina

मेरे अल्फाज़

प्रेम का गीत सावन महीना

Anonymous User

3 कविताएं

138 Views
हैं महीनों में हंसता यें पावन महीना!
हैं रिम झिम बरसता यें सावन महीना!!
हों सबको मुबारक , मन का कोलाहल!
और यौवन दिलों का यें भावन महीना!!

संघ रिम झिम बरसता यें सावन महीना!!
संघ रिम झिम बरसता यें सावन महीना!!

है गर्मी से राहत में पानी का दिन यें!
हैं नदियों में चढ़ते जवानी का दिन यें!!
हों सबको मुबारक,उस भीगे बदन संघ!
यें क़ातिल नज़र सा लुभावन महीना!!

संघ रिम झिम बरसता यें सावन महीना!!
संघ रिम झिम बरसता यें सावन महीना!!

हैं मेघों की मस्ती भी छिपकी लगायें!!
हैं बगिया में बूंदो से चिपकीं लतायें!
हों सबको मुबारक , गीतों का हलचल!
यें झूलो पे कजरी का गावन महीना!!

संघ रिम झिम बरसता यें सावन महीना!!
संघ रिम झिम बरसता यें सावन महीना!!


(आकाश कुमार)


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!