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मेरे अल्फाज़

कि तुम सामने हो

Akanksha Srivastava

17 कविताएं

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इस जर्जर रात को,
जरा मरहम लगा दूँ मैं,
कि तुम सामने हो,
तो दुनिया को भुला दूँ मैं,

एक जिक्र भर हो,
पूरी गजल लुटा दूँ मैं,
कि तुम सामने हो,
तो दुनिया को भुला दूँ मैं,

शीशा टूटे तो टूटे,
तुझे आईना बना लूँ मैं,
कि तुम सामने हो,
तो दुनिया को भुला दूँ मैं...

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