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मेरे अल्फाज़

ज़िंदगी एक एहसास

Akanksha Singh

2 कविताएं

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जिंदगी तुझसे बड़े सवाल हैं
तेरे नखरे भी बड़े कमाल हैं
एक रोज फुर्सत से मिल तू
मुझसे भी कुछ बातें कर तू

सुना है बड़ी खामोश रहती है
अपनी शातिर निगाहों से मुझ पर नजर रखती है
कब तक ऐसे लुका छिपी करती रहेगी जानती सब पर कुछ भी न कहेगी
न जाने किस पल का तुझे इंतजार है
ना जाने कौन सी घड़ी में तेरा आना होगा?
कभी कभी ख्याल आता है तुझसे रूठी रहूं और खामोश हो जाऊं ,
तू मनाने आए और मैं फ़िर मान जाऊं, बैठकर हम फिर सारी बातें करेंगे
रात दिन बस हंसते मुस्कुराते रहेंगे,

फिर न ही किसी का इंतजार होगा
तेरी मेरे दरमियां किसी के लिए न कोई जगह होगी,
मुद्दतों बाद मैं मन ही मन खिल-खिलाऊँगी,
तुम हमको और मैं तुमको अपनी कहानी सुनाऊँगी।


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