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Ajb gajb

मेरे अल्फाज़

अजब गजब

श्याम सिंह

30 कविताएं

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अजब गजब इस दुनिया के निशान देखे
हर गली हर चौक चौराहे पर
अलग-अलग भगवान देखे
कोई कहै अल्लाह कोई कहै राम
कहीं गुरुवाणी कहीं जलते हुए
मोमबत्तियों के निशान देखे ।

अजब गजब खेल इस दुनिया का
मन के भीतर बैठे ना जाने कितने रावण
फिर भी मुंह मैं जपते सब राम देखें
फूलों कम्बलों हारौ सोने से सजे यहां भगवान देखे
हे ईश्वर एक -
फिर भी धर्म के नाम पर बटते इंसान देखे ।

बना दिए बिल्डिंग मंजिलें जिन्होंने हजारों
अब भी उनके हाथों में छालों के निशान देखे
ओड़े जो मुखोटा धर्म का
एसो को पूजते इंसान देखे
कैसी यह विडंबना इस धरती की
सरहदो पर इंसान से ही गोली खाते जवान देखे ।

करे जो छलावा उनके सोने के मकान देखे
धरा के जो है मालिक
उनके पानी से टपक ते हुए मकान देखे
अनेकों मरते यहां हमनें भी किसान देखे ।

कैसी है मेरी मालिक तेरी माया
अजब गजब इस जहां पर
तेरे नाम को बाटते
इंसान के रूप में हैवान देखे ।

-श्याम सिंह बिष्ट
डोटल गांव
उत्तराखंड
9990217616

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