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मेरे अल्फाज़

--कहने को तो बहुत कुछ है ,मगर कुछ कह नहीं सकता

Ajay Singh

10 कविताएं

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इस शायर के कुछ शेर अभी बाकी है ,मगर इजहार कर नहीं सकता ,
जन्म से ही बेवफा हूँ ,इसलिए इश्क़ कर नहीं सकता ,

मेरी किस्मत की अलग तक़दीर लिखी है खुदा ने , मगर खुदा को गलत कह नहीं सकता ,
मेरी आँखे आँसू से भरी है ,सो कुछ पढ़ नहीं सकता ,

मैं पत्थर हूँ जो मूरत बनने के लिए ,हतौड़ी को रोक नहीं सकता ,
कहने को तो बहुत कुछ है ,मगर कुछ कह नहीं सकता ,


नियम तो बहुत बनाया है ,मगर उसपर अमल कर नहीं सकता ,
जैसे तालाब में कीचड़ न हो , तो कमल खिल नहीं सकता ,

दिए हैं दुनिया ने अनेकों जख्म ,पर उनपर मरहम लगा नहीं सकता ,
क्योकि खुदा ने जो नियति में लिखा है , उसको मैं बदल नहीं सकता ,

अगर कविता लिखूँ , तो उसमे भाव दे नहीं सकता ,
कहने को तो बहुत कुछ है ,मगर कह नहीं सकता ,

--अजय राजपूत ( झाँसी )


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