आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Ajay rajpoot (jhansi)

मेरे अल्फाज़

कहने को तो बहुत कुछ है

Ajay Singh

10 कविताएं

93 Views
--कहने को तो बहुत कुछ है ,मगर कुछ कह नहीं सकता--

इस शायर के कुछ शेर अभी बाकी है ,मगर इजहार कर नहीं सकता ,
जन्म से ही बेवफा हूँ ,इसलिए इश्क़ कर नहीं सकता ,

मेरी किस्मत की अलग तक़दीर लिखी है खुदा ने , मगर खुदा को गलत कह नहीं सकता ,
मेरी आँखे आँसू से भरी है ,सो कुछ पढ़ नहीं सकता ,

मैं पत्थर हूँ जो मूरत बनने के लिए ,हतौड़ी को रोक नहीं सकता ,
कहने को तो बहुत कुछ है ,मगर कुछ कह नहीं सकता ,


नियम तो बहुत बनाया है ,मगर उसपर अमल कर नहीं सकता ,
जैसे तालाब में कीचड़ न हो , तो कमल खिल नहीं सकता ,

दिए हैं दुनिया ने अनेकों जख्म ,पर उनपर मरहम लगा नहीं सकता ,
क्योकि खुदा ने जो नियति में लिखा है , उसको मैं बदल नहीं सकता ,

अगर कविता लिखूँ , तो उसमे भाव दे नहीं सकता ,
कहने को तो बहुत कुछ है ,मगर कह नहीं सकता ,

--अजय राजपूत ( झाँसी )


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!