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मेरे अल्फाज़

उपहार

Aditya Gupta

27 कविताएं

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फूल और पत्ती हैं पौधे के अभिन्न अंग
जिनके बिना वृक्ष नहीं है वृक्ष
पत्ती ने फूल से कहा
क्यों मिला मुझे एक ही रंग
जबकि तुम्हें मिले अनेक रंग
फूल ने पत्ती से कहा
तुम्हीं में होता भोजन का निर्माण
पालनहार का होता सदा एक ही रंग
हो तुम पालनहार
इसीलिए मिला तुम्हें एक ही रंग।
काटो ने फूल से कहा
तुम्हें देख जहां मुस्कुराए
मेरा स्पर्श सबको रुलाए
फूल ने काटे से कहा
तुम्हारा चुभन का गुण
करता है मेरी सुरक्षा
है जहां में ठोकरें बहुत
ना बच पाता में अगर ना होते तुम
चाहता है मानव
तुम्हारे जैसा सुरक्षा कवच
बचपन जवानी बुढ़ापा
सब रो रहे आज
ढूंढ रहे मांग रहे सुरक्षा का उपहार

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