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मेरे अल्फाज़

मुस्कुराने की आदत सी क्यूं हो गई

Aditi Thakur

1 कविता

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होंठ खामोश हैं आंखे रहती हैं नम
हरपल है आदत अब मुस्कुराने की
कुछ हसीं ख्यालों में गुम
गुनगुनाने की आदत सी हो गई
एक संदेशा दे कर दिलवर गया
वो खुशी से मेरा दिल भर गया
पंछियों की तरह फड़कते है पर
उड़के जाने की आदत सी हो गई
होंठ ख़ामोश हैं आँखे रहती हैं नम
हरपल मुस्कुराने की आदत सी हो गई

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