स्वप्न की रात

                
                                                             
                            रात की याद सपनों का साथ, पीछे थे हम आगे थी मंजिल की शुरुआत।
                                                                     
                            
सवेरे का बांग, दिन की मुस्कान, मंजिल तो बस कुछ दूर पर साथ।
रास्ते में बदनामी पत्थरों की पहचान, सपनों से मुलाकात जिंदगी की शुरुआत।
पतवारों को मोड़ लहरों को सांभाल, आगे है दिन तो पीछे स्वप्न सजी शाम।
किस्मत की राह नियति से बंधी, खोल बाजुओं का बल बांध सपनों की कड़ी।
नामुमकिन की खोज मुमकिन से मिली, बस ‘न’ तो है स्वप्न, मुमकिन है सभी।
धुंए का धाक, आंखों का भ्रम, मोड़ हैं सम्भव जरूर रास्ते हैं कठिन।
सपनों के पंख की सुंदरता बेमिसाल, हर पंथ पर बिछी आपकी कामयाबी की मिसाल।

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1 month ago
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