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मेरे अल्फाज़

भूल जाता हूं

Adarsh Tiwari

2 कविताएं

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"तुम्हें मैं चाहता जी भर जताना भूल जाता हूँ,
मुझे तुम से मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ!!
तेरी गलियों में आ कर घूमना
अच्छा लगे लेकिन,
तुम्हारे साथ रह खुद का ठिकाना भूल जाता हूँ!!
बस इतनी बात पर लोगों को मैं अच्छा नहीं लगता,
वजह हो तब भी लोगों को हँसाना भूल जाता हूँ!!
शरारत करके आंखो से, वो तेरा देखना तौबा,
मैं नजरें अपनी तुझ से हटाना भूल जाता हूँ!!
मोहब्बत कब हुई कैसे हुई सब याद है मुझको,
ग़मों की भीड़ इतनी है निभाना भूल जाता हूँ!!"
आदर्श


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