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मेरे अल्फाज़

मुझमे भी कुछ तुझसा है...

Adarsh Kumar

10 कविताएं

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मुझमे भी कुछ तुझ सा है
अथाह भी अशांत भी
असीमित भी अविरल भी
सतत भी और निर्मल भी
मुझमे भी कुछ तुझ सा है

दोनों पाने की चाह लिए
कुछ देने की आतुरता में
रहते उड़ेलते हरदम दोनों
रखते नहीं हैं कुछ भी पास
शिवा प्रेम के और विश्वास
मुझमें भी कुछ तुझ सा है

तुमसे ही तो सीखा है मैंने
देकर भी तो कुछ ना खोना
जो मेरा है उसमें ही जीना
जो नहीं उसे ना रोना
ले सीख सदा हर मुश्किल से
निज जीवन ज्योति संजोना
मुझमें भी तो कुछ तुझ सा है

- आदर्श कुमार तिवारी

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