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मेरे अल्फाज़

मां...

Abhishek Panwar

2 कविताएं

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माँ आज खाना तू खिला दे
बचपन का सब याद दिला दे

तेरे हाथ के दो निवालो में मै भर पेट सो जाता था
अब तो पूरा खाना खाकर भी मै भूखा सा रह जाता हु
जब से तुजसे मै दूर गया मुझे नींद अब ना आती है
थक हार के जैसे तैसे रात भर बस करवटे बदलती जाती है
तेरा माथे पर हाथ लगाना और मेरा चैन से सो जाना
माँ तेरे उस दुलार से आज फिर मुझे एक बार सुला दे
माँ आज खाना तू खिला दे
बचपन का सब याद दिला दे

हो कोई परेशानी या कोई सवाल तू ही थी मेरा हार एक जवाब
तू साथ थी मेरे हर एक लम्हे मे मै ही गया दूर तुजसे करने पूरे कुछ मेरे ख्वाब
अब ना घर है ना तू है ना तेरा वो अपनापन
एक मकान है बस खाली सा टूटा सा तनहा सा ये मन
कुछ गलत भी मै करदु तो कोई रोकता नहीं है
मै खुश ना रहु तो मुझे कोई टोकता नहीं है
आज फिर मै देर से घर आया माँ आज फिर मेरी तू डाट लगा दे
माँ आज खाना तू खिला दे
बचपन का सब याद दिला दे

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