आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Hameed ke Dohe

मेरे अल्फाज़

बात नहीं ये ठीक है

Abdul Hameed

30 कविताएं

7 Views
हमीद के दोहे

बात नहीं ये ठीक है,छेड़ो मत आईन।
मानो सबको एक सा ,कायम करो यक़ीन।

सत्ता केवल चाहते,नहीं देश से प्यार।
हर सू लगनी चाहिए,bअब इनको फटकार।

आज जल रहा जामिया,लगी हुई है आग।
कैसे आखिर ये बना, जलियां वाला बाग।

आज जवानों को नहीं, होती राशन पूर्ति।
शासक वर्ग लगा रहा, हर चौराहे मूर्ति।

संविधान पर देश में, सबको है विश्वास।
जनता की ये आस है,तोड़ो मत ये आस।

हमीद कानपुरी
अब्दुल हमीद इदरीसी


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!