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Heiwaniya

मेरे अल्फाज़

हैवानियत

Aap Sangeeta

21 कविताएं

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क्या हिन्दू क्या मुसलमान
जिनके साथ ये हो रहा है
है पहले वो इंसान

क्यों इंसानियत को यूँ
कुछ लोग तमाशा बना रहे है

माँ, बहन, बेटियों को
यूँ बे-आबरू किये जा रहे है

हम बस यूँही कहते रह जाते है
कुछ बहशी दरिंदे
हर रोज किसी की आबरू से ख़ेल जाते है

जाने कब तक ,जाने कब तक
ये होता रहेगा
कब तक ये ,हैवानियत का सिलसिला चलेगा

कब तक ये बहशी दरिंदे
यूँ घूमते रहेँगे

मानव के मुखोटे में
ये झूमते रहेंगे

आखिर कब तक
आखिर कब तक

- के. भानु

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