आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   kyon n ladki dikhai ki pratha badli jaye

मेरे अल्फाज़

क्यों न लड़की दिखाई की प्रथा बदली जाए

aadrash kumar

6 कविताएं

363 Views
क्यों न लड़की दिखाई की प्रथा बदली जाए
अच्छे पुराने रिवाज अपनाई जाए
न हो लड़की वालों को भी दुःख
लड़के वालों की भी इच्छा हो पूरी जाए।

न होती थी पहले इतनी दिखाई
न ही लड़की को झेलनी पड़ती थी रुसवाई
न ही होता था इतना खर्च
न होती थी जग-हँसाई

जब हो ऐसी प्रथा तो
क्यों न ऐसी प्रथा अपनाई जाए
लड़की को भी होता हैं इससे दुःख
इस बात को समझी जाय।

अब ऐसे समय में हम यहाँ आ गए हैं
जहाँ फोटो भी बनाये जा रहे हैं
यकीन की बात तो छोड़िये
सही फोटो पर भी शक हो जा रहे हैं।

ऐसी स्थिति में ऐसे तामझाम से
क्यों न अलग राह निकाली जाए
जिस रूप में रहे वो सहज
हो उसकी वास्तविकता की जानकारी
क्यों न ऐसी राह अपनाई जाए
क्यों न लड़की दिखाई की प्रथा बदली जाए।

पहले का प्रथा था कितना प्यारा
पब्लिक गेदरिंग का होता था सहारा
क्यों न ऐसी राह अपनाई जाए
क्यों न लड़की दिखाई की प्रथा बदली जाए।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!