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मेरे अल्फाज़

ए आसमां तू बाहों में आजा

कवि आमद

8 कविताएं

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गजल
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ए आसमां तू बाहों में आजा।
आफताब तू राहों में आजा।

ए समर्पण घूमता है तू कहाँ,
इस चहाँ की चाहों में आजा।

हे दया के भाव छिप रहा है तू कहाँ,
बावरे इन शाहों में आजा।

किस ग्रह पर तू बसा, प्रेम सुन ले मेरी,
इन दिशा चारों में आजा।

जुस्तजू है पाक बन तू सुन जरा,
बह रही धारों में आजा।

ए सच्चाई मान ले तू बात ये,
'आमद' के यारों में आजा।

रचनाकार -के.के.सिंह 'आमद' साधुपुरी
साहित्य स्रजन मंच, फिरोजाबाद


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