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मेरे अल्फाज़

दोस्त, मैं देख चुका हूं होशंगाबाद

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दोस्त, मैं देख चूका हूं होशंगाबाद
वापस चल
मनमोहती नर्मदा और उसके सुंदर घाट
मंदिरों में विराजे भगवान और उनके भाट
ठेके पर होती अब नर्मदा की भव्य आरती
सत्संग को तरसे सत्संग भवन, ताला किनका है जड़ा
धर्मशालाओ- गौ शालाओ से कब्ज़ा अब तक नहीं हटा
हरी दूब फूलों के गलीचे ऊंची जिनकी मीनार
मंदिर ट्रस्टों के ठेके उनके नगर के वे जमीदार
नेता बनकर करे चाकरी जनता के चितचोर
चैन चुराकर जनता का फिर भी बने हुए है सिरमौर
खोपडियों में है इनके शातिर चाले खुद को बताते नेक
खोह में खो गई जनता? कुछ ने दिए घुटने टेक
दोस्त में ...देख चुका होशंगाबाद
वापस चल ...

दोस्त में ...देख चुका होशंगाबाद, जिसकी बात निराली
कहते लोग बगीचा जिसको, वह अग्रवालों की थी फुलवारी ।।
रईस कहाते सेठ वहा के, नन्हेलाल सेठ हुए विख्यात
कई गांवों के मालगुजार, दानवीर घासीराम थे उनके तात ।।
जनता के थे ये सच्चे सेवक, बातें है कुछ थोड़ी पुरानी
कुए-बाबरी, ताल तलैया, सूखी धरती पर खुदवाती सेठानी ।।
अलख जगायी शिक्षा की, लाये बच्चो के जीवन में उजियारा
सेठ नन्हेलाल घासीराम ने, एसएनजी स्कूल बनवाया प्यारा ।।
नर्मदा कालेज रईस नन्हेलाल ने बनवाकर , इस नगर पर बड़ा उपकार किया
नर्मदा के तट पर सेठानी घाट बनवा सेठानी ने, इस नगर का पूर्ण श्रृंगार किया ।।
थे बड़े दानी ये सेठ सेठानी, सपने अधूरे जीवन में ये तलाशते थे किनारा
मझदार में थी नैया भाग्य में न था खिवैया, बेटे बिना कौन बनता इनका सहारा ।।
पीव धुंधली थी जीवन की दिशाए तब पंडित रामलाल जी कुहासा बन आये
सेठ सेठानी को मिली संजीवनी, दत्तक बेटा जब सेठ की पहचान बन आये ।।
दोस्त में देख चुका होशंगाबाद
वापस चल फिर शहर देखने आयेंगे

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