आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Har gum main bhi muskura deta hoon

मेरे अल्फाज़

हर गम में भी मुस्कुरा देता हूं।

6 Views
हर गम में भी मुस्कुरा देता हूं।
गैरो को भी गले लगा लेता हूं ।।

लाख मारता हो दुनिया मुझपर ताना।
हँसकर मैं उसे यूं ही भूला देता हूँ ।।

ये जिंदगी बस चंद दिनों की है यही सोच ।
अपनों संग बैठ थोड़ा वक्त बिता लेता हूँ ।।

भले ही याद न करता चाहता हो जमाना मुझे मगर।
उनके यादों के डेरों में एक आशियाना बना ही लेता हूं।।

पता नहीं कैसा है अपनों के प्यार में मिक़नातीस।
न चाहते हुए भी उनकी तरफ चला आता हूं।।

फिर मिले न मिले ये दामन-ए-शब ।
सोकर खुले फलक के नीचे सुकूते-दर्द पा लेता हूं।।

जब भी होता है मन ये मेरा मुज़्तरिब ।
अम्मा के आँचल में सो तस्की पा लेता हूं।।

आदित्य रहब़र
लंगट सिंह कॉलेज, मुजफ्फरपुर, बिहार

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!